जगत कहा रुकता है
वो एक सोंग है न !! चिराग अपनी धरती का बुझता है तब भी सितारे तो अम्बर के रोते नहीं है !!
जब तक ये होना न होना दोनों को एक साथ नहीं देखते तब तुक देखना पूर्ण नहीं है ।
आ वो सर्वांग दर्शन को जाने।
गीता का एक श्लोक बहोत कुछ कहता है . य़ह pashyati s: pashyati

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