Thursday, August 28, 2014

समस्या का सुलजाव चिंता नहीं है

चिंता दूसरे विध विध स्वरूप पकड़ लेती है।  यहाँ चिंता को नष्ट करने के रचनात्मक उपाय,विश्लेषण,किसीकी सलाह लेना,पुन: अर्थघटन ,बचाव प्रयुक्ति है।  इसमें भी दूसरोंकी मार्ग दर्शन लेकर  ખુદ ही निर्णय लेना सही रास्ता है !!


लेना और देना

किसीको प्रेम ,किसीको पैसा ,किसीको नाम ,किसीको काम  बस मागने वाले ही है !! जैसे चारो और भिखारी !! इसी लिए एक बात सही है !!  देते जाओ बस देते जाओ !! सूरज जैसे प्रकाश देता है !!
 मुझे कर्ण  की कथा याद आती है !! इंद्र  ब्राह्मण का रूप लेकर जाता है और चालाकी से दान के रूप में कवचकुंडल माग लेता है !! तब कारण का सारथि  शल्य  कहता है। इन्द्र  ने आपको उल्लू  बनाया !! कर्ण  कहता है  । यज्ञ में दी हुई आहुति और किसीको दिया हुआ कभी नाशवंत नहीं है !! हुतम च दत्तं तथैव तिष्ठति !! 


કયો કલશ કરે !!

મંથન મુજ તુજ માત  હો વંદન 
અંતર મન  કયો  કલશ  કરે !!
સના  નો સનસની  ગયો  જવાબ
પડી  પડી થર થરી  ગયો છે 
उनकी  बातो  में दम  नहीं !
फिर  भी सुनना  तो होगा !!
they don't listen
but you must tell them !!
अब  आई  न बात 
अपने  अपने  हिसाब   से  चलते  है सब !!







यह पाश !!

जान लियो क्यों नाच्यो मै  हरी !!
तू  बस इतनो पास !
पत्थर मट्ठर कोई नहीं बस 
ममत  केरी यह पाश !!


ભોગી ઓ માપ માં રહો!

 ફળ સામે જ છે જ્યારે કર્મ તેની પૃષ્ઠ ભૂમિમાં છે. વનસ્પતિ ઘાસ નું વધવું ઘટવું તેમાં વાઘ હરણો તો કર્મ છે. ઘાસ વધી જાય ત્યારે હરણ ના બચ્ચા વધી ...