Thursday, March 9, 2017

दूर दूर

पीछे नज़र दौड़ाएंगे तो केवल विस्तृति के जंगल है !! हजारो लाखो दिन गुजर गए है !! आज भी सृष्टि तो चालू ही है यह हकीकत है !!और भावी आगे  लाखो करोडो दिनों का है !!बस उसकी कल्पना कर सकते है !!जैसे विशाल अमाप समंदर जिसका किनारा ही नहीं !! इसमें ये आना ये जाना !!फिर भी कमाल तो देखो कई विज्ञानी संत हमें समजा  रहे है इस सृष्टि का रहस्य !! बस एक गीत याद आ जाता है ज्ञान की सीमा जैसा ज्ञानी ! गागर में सागर का पानी !!

ભોગી ઓ માપ માં રહો!

 ફળ સામે જ છે જ્યારે કર્મ તેની પૃષ્ઠ ભૂમિમાં છે. વનસ્પતિ ઘાસ નું વધવું ઘટવું તેમાં વાઘ હરણો તો કર્મ છે. ઘાસ વધી જાય ત્યારે હરણ ના બચ્ચા વધી ...