Thursday, September 28, 2017

दर्पण रूप शरीर

अंतर बाहिर एक ही रामा
ज्ञान न ज्योत भइ
मैं मैं कर मरने चल्यो
दर्पण मस्त शरीर !!

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प्रथम देखो  देह को।यह बुद्धि से संबंध । में और समज । इसके पीछे चेतना
एवं चेतना के कारण आतम तत्व जो परमात्मा का अंश है । और ये देह जो अनेक कोशो का बना है यह सबके सब जीवित है।ये कोष की रचना अनेक आत्मो से बनी है । कमाल की बात तो धातु मूल जीव । जीव में तो ये दोनों है । और धातु । अणु । यह तो पृथ्वी तत्व ।मूल अवकाश । यही शून्य काल वह तो परमात्मा  के कारण है  । यह प्रतिक्षण बदलता नाशवंत देह तुम कहा हो ? बस ध्यान यहां ज्ञान की पराकाष्टा पर लग जाता है !!

Wednesday, August 16, 2017

अंदर एक ही तार

अगर हम एक ही सूरज की किरणें है तो बाहर मिल ही नही सकते !!

बहिरमिलन की आशा मूरख
अंदर एक ही तार
मन मूरख स म जावत हंस दे
घा अपमान तू  मा न
अंदरसे पितर भी मिलेंगे
बाहिर सब बदमाश
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जो नही है वो पाने के लिए दौड़ते है लोग !!
लाइब्रेरी दुर थी जाते थे कौन
उछल कर आ गई मोबाइल में
भटक जा ढूंढता है कौन
बिखरा है भोजन चहुँ ओर जालिम
अब ढूढते हम खानेवाला है कौन !!
अटक जा भटक जा
नही तो ढूढ़ता रहेगा अपने आपको !!
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भटक जा लाइब्रेरी में
अटक जा भूख लगती है प्यारे
सटक जा लाइक करदे प्यारे
मटक मटक करती है आंखे
घुस जा मोबाइल में
भटक जा
ढूढ़ता जा कुछः न कुछ
मिल जाएगा एक दिन ख़ुद !!
खुदाई बरसी उमर बरसी
देख दर्पण कहा आयो रे !!
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छूटी गोली आसमान में
गई कहा मालूम नही
जय श्री कृष्ण !!
कोई ढूढ़ता है
कोई देखता है
कोई करता है लाइक !!
गिनते रहो
जीते रह्यो
આ તો રમત રમાડે રામ !!
ये चाय लो भाई चाय !!
ज्ञान तो होता ही है न !!


Thursday, July 13, 2017

वमन

कहत मैं कोई सुनत नही
क्यों कहत हरि भाई !!
समजत नही जो दु:ख भयो
वमन पचत कुछ नाही
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मूरख शिष्य मिला तो गुरु भला क्या नाम  का !!
कीमिया आजमाना है   पटारा किस काम का !!
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समज नही नही प्रेम है नही आकर्षण खेल
नही सहायक मित्र भी बस सेवा प्रभु दी जेल !!
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मै  और मेरा मन बदमाशी खेलत  जाए शतरंज की बाजी !!
मन आवेगी तन जडपत है !! मै चलावत मोरी गाडी !!
इस छेड़ा छेड़ी में पागल हँसत जहां पागल नर नारी !
कितने चाहे थक जाए मन खोया क्या नहीं हारे बाज़ी !!
जित तमाशा ताली न पाई धन्य ही जाने वो रघुराई !!




लाइब्रेरी

जिसका ज्ञान परिवर्तित नही होता है कर्म में
वो एक लाइब्रेरी बन जाता है खुद ही !!
याद रहे लाइब्रेरी घर घर घूमती नही !!
बस  एक ही रास्ता अपने आप मिल जाता है
वो है ध्यान !!
ज्ञान बिना भला ध्यान कहाँ ?
निन्दर  नशा  बाकी रहा !!


Wednesday, June 28, 2017

ज्यादा

ज्यादा इमोसन से मत सोच। यहाँ गलती है खुद की क्या याद क्या अपनापन !! ये अपना सोचेंगे ।मैंने देखा है छोटे मन वाले छोटी सोच रख्खेगे । इनकी सोच पुरानी है
कई बार समजाया

न समजे तो क्या करे
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प्यार है तो नाज़ भी उठाया करो
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विराट  नी अमरता
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अमीर बेकदर  ग़रीब कद्रदान क्या काम के
गरीब मददगार हो अमीर कदरदान हो !!

अपनो के  लिए तो गोटिया ही सही
कहाँ बेचना है इल्म को
जाने तो भी क्या
न जाने तो भी क्या

।।।।
मत निकल गुस्सा तू
मत समजाने जा कभी
समज भी एक चीज़ है
सबको ये आती नही
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देह वास्तविकता प्रेक्टिकल
मन  भावुकता आध्यात्मिक

समज ज्ञान
आत्मतत्व
काम हरि का दिल तू करना
तोहे हरि मिलेंगे
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Thursday, March 9, 2017

दूर दूर

पीछे नज़र दौड़ाएंगे तो केवल विस्तृति के जंगल है !! हजारो लाखो दिन गुजर गए है !! आज भी सृष्टि तो चालू ही है यह हकीकत है !!और भावी आगे  लाखो करोडो दिनों का है !!बस उसकी कल्पना कर सकते है !!जैसे विशाल अमाप समंदर जिसका किनारा ही नहीं !! इसमें ये आना ये जाना !!फिर भी कमाल तो देखो कई विज्ञानी संत हमें समजा  रहे है इस सृष्टि का रहस्य !! बस एक गीत याद आ जाता है ज्ञान की सीमा जैसा ज्ञानी ! गागर में सागर का पानी !!

Saturday, January 7, 2017

बेदिली

कई लोग मुझे पहचान ते तक नहीं ! कुछ लोग जानते है वो अपने अपने हिसाब से !!कुछ तो अभी तक जान भी नहीं सके है ठीक तरह से ! इन आधे जान कारो से तारीफ हो ही गई या कॉमेंट !!दिल पर लेने की आदत ही उलझा देती है मुझको !!इसीलिए बार बार एक ही आवाज़ आती है बेदिली भी कोई चीज़ है यारो !!
सोरी की पराकाष्ठा
दामन को बचाकर गुजर जाने में अच्छा है 
વાતે વાતે તોછડા અને અપમાન કરનારા ઓ જ જો સંબંધ મા આવતા હોય તો તમારે પ્રેક્ટિકલ બન્યેજ છૂટકો છે.
કોષ જ્ઞાન ની દૃષ્ટિ એ તો ખસતા રહેવા માં જ શાંતિ છે.તેમના થી મળતી સહાય કરતા ત્રાસ વધુ હોય છે

ભોગી ઓ માપ માં રહો!

 ફળ સામે જ છે જ્યારે કર્મ તેની પૃષ્ઠ ભૂમિમાં છે. વનસ્પતિ ઘાસ નું વધવું ઘટવું તેમાં વાઘ હરણો તો કર્મ છે. ઘાસ વધી જાય ત્યારે હરણ ના બચ્ચા વધી ...