अंतर बाहिर एक ही रामा
ज्ञान न ज्योत भइ
मैं मैं कर मरने चल्यो
दर्पण मस्त शरीर !!
.....
प्रथम देखो देह को।यह बुद्धि से संबंध । में और समज । इसके पीछे चेतना
एवं चेतना के कारण आतम तत्व जो परमात्मा का अंश है । और ये देह जो अनेक कोशो का बना है यह सबके सब जीवित है।ये कोष की रचना अनेक आत्मो से बनी है । कमाल की बात तो धातु मूल जीव । जीव में तो ये दोनों है । और धातु । अणु । यह तो पृथ्वी तत्व ।मूल अवकाश । यही शून्य काल वह तो परमात्मा के कारण है । यह प्रतिक्षण बदलता नाशवंत देह तुम कहा हो ? बस ध्यान यहां ज्ञान की पराकाष्टा पर लग जाता है !!
ज्ञान न ज्योत भइ
मैं मैं कर मरने चल्यो
दर्पण मस्त शरीर !!
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प्रथम देखो देह को।यह बुद्धि से संबंध । में और समज । इसके पीछे चेतना
एवं चेतना के कारण आतम तत्व जो परमात्मा का अंश है । और ये देह जो अनेक कोशो का बना है यह सबके सब जीवित है।ये कोष की रचना अनेक आत्मो से बनी है । कमाल की बात तो धातु मूल जीव । जीव में तो ये दोनों है । और धातु । अणु । यह तो पृथ्वी तत्व ।मूल अवकाश । यही शून्य काल वह तो परमात्मा के कारण है । यह प्रतिक्षण बदलता नाशवंत देह तुम कहा हो ? बस ध्यान यहां ज्ञान की पराकाष्टा पर लग जाता है !!








