Thursday, July 13, 2017

वमन

कहत मैं कोई सुनत नही
क्यों कहत हरि भाई !!
समजत नही जो दु:ख भयो
वमन पचत कुछ नाही
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मूरख शिष्य मिला तो गुरु भला क्या नाम  का !!
कीमिया आजमाना है   पटारा किस काम का !!
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समज नही नही प्रेम है नही आकर्षण खेल
नही सहायक मित्र भी बस सेवा प्रभु दी जेल !!
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मै  और मेरा मन बदमाशी खेलत  जाए शतरंज की बाजी !!
मन आवेगी तन जडपत है !! मै चलावत मोरी गाडी !!
इस छेड़ा छेड़ी में पागल हँसत जहां पागल नर नारी !
कितने चाहे थक जाए मन खोया क्या नहीं हारे बाज़ी !!
जित तमाशा ताली न पाई धन्य ही जाने वो रघुराई !!




लाइब्रेरी

जिसका ज्ञान परिवर्तित नही होता है कर्म में
वो एक लाइब्रेरी बन जाता है खुद ही !!
याद रहे लाइब्रेरी घर घर घूमती नही !!
बस  एक ही रास्ता अपने आप मिल जाता है
वो है ध्यान !!
ज्ञान बिना भला ध्यान कहाँ ?
निन्दर  नशा  बाकी रहा !!


ભોગી ઓ માપ માં રહો!

 ફળ સામે જ છે જ્યારે કર્મ તેની પૃષ્ઠ ભૂમિમાં છે. વનસ્પતિ ઘાસ નું વધવું ઘટવું તેમાં વાઘ હરણો તો કર્મ છે. ઘાસ વધી જાય ત્યારે હરણ ના બચ્ચા વધી ...