ये आनी ये जानी
ये दुनिया है फानी
अजब ज़िन्दगानी
ये सपनो की रानी
सोते में सरगम
मुर्दे में मौनी
गज़ब की कहानी
कहे कौन जानी
_____
बाहिर गुरुवर अंतर रामा
टिकयग्नोरी श्रवण सुधारा
कर फुवार कोऊन हरि नहाये
कीर्तिकरा सहसा विकराला
..........
कणे हरि तू
क्षणे हरि तू
व्यक्ताव्यक़्ते हरि: हरि: ।।
........
ધન નો ભાર ધની જાણે
જ્ઞાન નો ભાર જ્ઞાની !!
દર્શની વર્ણવી જાણે
યથા બુદ્ધિ કથા સુણી
जाते है जिसे जानते है हम l किन्तु ये अनजानों का जाना क्या है!
ये दुनिया है फानी
अजब ज़िन्दगानी
ये सपनो की रानी
सोते में सरगम
मुर्दे में मौनी
गज़ब की कहानी
कहे कौन जानी
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बाहिर गुरुवर अंतर रामा
टिकयग्नोरी श्रवण सुधारा
कर फुवार कोऊन हरि नहाये
कीर्तिकरा सहसा विकराला
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कणे हरि तू
क्षणे हरि तू
व्यक्ताव्यक़्ते हरि: हरि: ।।
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ધન નો ભાર ધની જાણે
જ્ઞાન નો ભાર જ્ઞાની !!
દર્શની વર્ણવી જાણે
યથા બુદ્ધિ કથા સુણી
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सपन जगन को खेल है साधो
कोई तरे कोई मेल
अंदर डुबयो सुख दुख पावै
तैरन को हरि खेल
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धड़कने विराट जब सुनेगो कोई स्वामी
खुद ही धुन बून्द बून्द बन गई सैलाबी
मिल गयो तू गण्ड राज जगत परनामी
पायो हरिहर जनम गवांयो
अब कछु नही आनि
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हकीकत ऐसी है जो हमें पसंद नहीं आती !!
कुछ हकीकत ऐसी है जो हमें पसंद नहीं आती !!
लेकिन है !!
यह गिफ्ट में मिली ज़िन्दगी !!
पल पल बदलता जिस्म !!
क्या नहीं कहता ?
गधे ज्ञानी के चर्चे में
फंस गयो राज ये जानी ,!!
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ज्ञान न दीजो यिन
खुद हरि अंतर माय
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कर क्लेश मोरो मन हरि लागे
धन धन धन संसार 2
अब पायो ये सजा को अरथन
भटक भटक भरमाय
धनराजे हिंडोलों गायो
दर्शन भयो हरि आज
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दर्शन बिन कछु मिलत ही नाही
दर्शन ज्ञान भयो बैरागी
क्षण क्षण सुख पुनो संसारा
देखन जाओ नही कोई हारा
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નામ વિરામ હરિ જપ ચાલ્યો
પુન: દિવાકર જગપતિ જાલ્યો !!
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રે પંખીડા! સુખથી ચણજો, ગીત વા કાંઈ ગાજો;
શાને આવા મુજથી ડરીને ખેલ છોડી ઊડો છો?
આમ આત્મ તત્વ સુરજ સમ સૌ જીવિત કોષો ને પોષણ આપી જાણે છે.આ કોષો ના ઢગલા ને આપણે પ્રાણી કહીયે છીએ.તેથી સ્તો જાણે આત્મ તત્વ કાવ્ય ગાઈ રહ્યું છે
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कभी लगता है ये अनजानों का जाना है नई सुबह का आना!!!


