Sunday, December 27, 2009
Saturday, April 11, 2009
कुछ गीतों में
प्रभु यहाँ सर्वत्र होते हुए भी ओजल है ...
वो जलवा जो ओजल भी है सामने भी वो जलवा चुराने को जी चाहता है
यहाँ प्रभु की व्याख्या ऊँची है !!वैसे देखने जाओ तो प्रभु एक ही है !! सभी धर्मो का सार है !! मन मुरख तू कहा फिर है हरी तो तेरे पास !! इसी गीत का यह मुझे बहोत अच्छा लगा है !!
मरने की बात
इश्क में जानते है जाने गई फिरभी कहेते है अजमाना है
जिंदगी का अजब फ़साना है
रोते रोते भी मुस्कराना है
याद
किसीकी यादमे दुनिया को है भुलाये हुए
जमाना गुजरा है अपना ख्याल आए हुए ॥
किसीके हुश्न की बस एक किरन ही काफी है
ये लोग क्यों शम्मा को मेरे आगे है लाये हुए !
आग
एक ऐसी आग लगी मन में
वो जलवा जो ओजल भी है सामने भी वो जलवा चुराने को जी चाहता है
यहाँ प्रभु की व्याख्या ऊँची है !!वैसे देखने जाओ तो प्रभु एक ही है !! सभी धर्मो का सार है !! मन मुरख तू कहा फिर है हरी तो तेरे पास !! इसी गीत का यह मुझे बहोत अच्छा लगा है !!
मरने की बात
इश्क में जानते है जाने गई फिरभी कहेते है अजमाना है
जिंदगी का अजब फ़साना है
रोते रोते भी मुस्कराना है
याद
किसीकी यादमे दुनिया को है भुलाये हुए
जमाना गुजरा है अपना ख्याल आए हुए ॥
किसीके हुश्न की बस एक किरन ही काफी है
ये लोग क्यों शम्मा को मेरे आगे है लाये हुए !
आग
एक ऐसी आग लगी मन में
जीने भी न दे मरने भी न दे
चुप हु तो कलेजा जलता है
चुप हु तो कलेजा जलता है
बोलू तो तेरी रुसवाई है
सिने में सुलगते है अरमान !
सपना
तुम कहेते हो ये जग सपना है हम कहेते है ये जग अपना है
तुम जनम गवा कर जाओगे हम जनम बिता कर जायेगे
संसार से भागे फिरते हो भगवन कहा तुम पाओगे
इस लोक को भी अपना न सके उस लोक में भी पछताओगे
याद करो वो चित्रलेखा का गीत
साहिर ने बहोत ऊँचे शब्द यूज़ किये है !!
सिने में सुलगते है अरमान !
सपना
तुम कहेते हो ये जग सपना है हम कहेते है ये जग अपना है
तुम जनम गवा कर जाओगे हम जनम बिता कर जायेगे
संसार से भागे फिरते हो भगवन कहा तुम पाओगे
इस लोक को भी अपना न सके उस लोक में भी पछताओगे
याद करो वो चित्रलेखा का गीत
साहिर ने बहोत ऊँचे शब्द यूज़ किये है !!
Sunday, March 22, 2009
सागर हु अपने वतन का पुजारी !!
कोई है बहरे चमन का पुजारी कोई है गुलो आसमान का पुजारी !
बूते मौलवी को कोई पूजता है कोई कश्का ऐ बरहम का पुजारी !
गुलो में गुल्माने जमजम है कोई कोई मौजे गंगा जमुना का पुजारी !
मगर मेरा जौके पस्तिश जुदा है मै सागर हु अपने वतन का पुजारी !!
सागर
न जुन्नार का गम न तस्बीह का गम ! दिमागी गुलामी से आजाद हु मै !!
अपना ही बुतकदा सज़ा अपने ही बुत पर ज़ोर ला ! तेरे दिमागों दिल पे हो दैरो रहम का बार क्यो ?
झनून ऐ खुदी का ये अय्नाज़ तो देखो !!
जब मौज आई खुदा हो गए हम !!
..सागर
हम नवां कोई नही है वह चमन मुजको दिया
हम वतन बात न समजे वह वतन मुजको दिया
फिराक
ये नही मुमकिन तो फीर ये दोस्त वीराने में चल !!
मुन्तजिर है एक तूफान ऐ बला मेरे लिए अब भी जाने कितने दरवाजे है व मेरे लिए !
पर मुसीबत है मेरा अहदे वफ़ा मेरे लिए .अ य ग में दिल क्या करू
मजरुह
अब कहा में धुन्धने जाऊ सुकू को अ य खुदा ?
इन जमीनों में नही ,इन असमानों में नही !!
जब्बी
में रकाबी में पियालो में महक सकता हु !
चाहिए बस लबो रुखसार का साया मुजको !!
जाफरी
यु ही कब तलक खुदाया गेम जिंदगी को निबाहे !
कही जुल्मातो में गिर कर है तलाशे दस्ते रहबर !!
मजरुहEISE
AISE ही कई लम्हों से गुजर गए है हम
अच्छासा दौर फिरभी नज़र आया है !!
हकीकत
Saturday, March 21, 2009
जोश की bate
गर्दनका तौक पाँव की ज़ंजीर काट दे । इतनी गुलाम कॉम हिम्मत कहा है जोश !!
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जिसको तुम भूल गए याद करे कौन उसको । जिसको तुम याद हो वो और किसे याद करे ?
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जो मौका मिल गया तो खिज्र से ये बात पूछेंगे ! जिसे हो जुस्तजू अपनी , वो बेचारे कहा जाए !!
------जोश--
लुफ्त कुछ दामन बचाकर ही गुजर जानेमे है !!
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हर एक सूरत ,हर एक तस्वीर मुल्हम होती जाती है ! इलाही ! क्या मेरी दीवानगी कम होती जाती है ?
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जिसे रौनक तेरे कदमो में देकर छीन ली रौनक ! वो लाख आबाद हो उस घरकी वीरानी नही जाती!!
=== जीगर===
रकीबे गम जादा अब सब्र कर ले !! कभी इससे मेरी भी दोस्ती थी! ! !
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कौन ये ले रहा है अंगडाई !! आसमानों को नींद आती है ।
-----फिराक
दीवानगी ऐ इश्क के बाद आही गया होश । और होश भी वो होश की दीवाना बना दे !!!
=== हाफिज
मैकदा था चाँदनी थी मै न था । एक मुजस्सिम बेखुदी थी मै न था !!
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मै उम्र भर अदम न दे सका जवाब !! वो एक नज़र में इतने सवालात कर गए !
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ભોગી ઓ માપ માં રહો!
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