Wednesday, August 16, 2017

अंदर एक ही तार

अगर हम एक ही सूरज की किरणें है तो बाहर मिल ही नही सकते !!

बहिरमिलन की आशा मूरख
अंदर एक ही तार
मन मूरख स म जावत हंस दे
घा अपमान तू  मा न
अंदरसे पितर भी मिलेंगे
बाहिर सब बदमाश
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जो नही है वो पाने के लिए दौड़ते है लोग !!
लाइब्रेरी दुर थी जाते थे कौन
उछल कर आ गई मोबाइल में
भटक जा ढूंढता है कौन
बिखरा है भोजन चहुँ ओर जालिम
अब ढूढते हम खानेवाला है कौन !!
अटक जा भटक जा
नही तो ढूढ़ता रहेगा अपने आपको !!
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भटक जा लाइब्रेरी में
अटक जा भूख लगती है प्यारे
सटक जा लाइक करदे प्यारे
मटक मटक करती है आंखे
घुस जा मोबाइल में
भटक जा
ढूढ़ता जा कुछः न कुछ
मिल जाएगा एक दिन ख़ुद !!
खुदाई बरसी उमर बरसी
देख दर्पण कहा आयो रे !!
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छूटी गोली आसमान में
गई कहा मालूम नही
जय श्री कृष्ण !!
कोई ढूढ़ता है
कोई देखता है
कोई करता है लाइक !!
गिनते रहो
जीते रह्यो
આ તો રમત રમાડે રામ !!
ये चाय लो भाई चाय !!
ज्ञान तो होता ही है न !!


ભોગી ઓ માપ માં રહો!

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