Saturday, March 21, 2009

जोश की bate


गर्दनका तौक पाँव की ज़ंजीर काट दे इतनी गुलाम कॉम हिम्मत कहा है जोश !!
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जिसको तुम भूल गए याद करे कौन उसको जिसको तुम याद हो वो और किसे याद करे ?
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जो मौका मिल गया तो खिज्र से ये बात पूछेंगे ! जिसे हो जुस्तजू अपनी , वो बेचारे कहा जाए !!
------जोश--
लुफ्त कुछ दामन बचाकर ही गुजर जानेमे है !!
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हर एक सूरत ,हर एक तस्वीर मुल्हम होती जाती है ! इलाही ! क्या मेरी दीवानगी कम होती जाती है ?
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जिसे रौनक तेरे कदमो में देकर छीन ली रौनक ! वो लाख आबाद हो उस घरकी वीरानी नही जाती!!
=== जीगर===
रकीबे गम जादा अब सब्र कर ले !! कभी इससे मेरी भी दोस्ती थी! ! !
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कौन ये ले रहा है अंगडाई !! आसमानों को नींद आती है
-----फिराक
दीवानगी इश्क के बाद आही गया होश और होश भी वो होश की दीवाना बना दे !!!
=== हाफिज
मैकदा था चाँदनी थी मै था एक मुजस्सिम बेखुदी थी मै था !!
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मै उम्र भर अदम दे सका जवाब !! वो एक नज़र में इतने सवालात कर गए !

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