जिसका ज्ञान परिवर्तित नही होता है कर्म में
वो एक लाइब्रेरी बन जाता है खुद ही !!
याद रहे लाइब्रेरी घर घर घूमती नही !!
बस एक ही रास्ता अपने आप मिल जाता है
वो है ध्यान !!
ज्ञान बिना भला ध्यान कहाँ ?
निन्दर नशा बाकी रहा !!
वो एक लाइब्रेरी बन जाता है खुद ही !!
याद रहे लाइब्रेरी घर घर घूमती नही !!
बस एक ही रास्ता अपने आप मिल जाता है
वो है ध्यान !!
ज्ञान बिना भला ध्यान कहाँ ?
निन्दर नशा बाकी रहा !!

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