Tuesday, June 21, 2016

आदत ने हद कर दी है !!

गुजरे कल   के  मार की पी डा  आज है !!
कल्पना  आने  वाले  कल  की  डरा रही  है !!
आज  खोता  रहा  हु
बस  यही आदत ने हद  कर दी है !!
...
अवरोध को देखो बार बार
अरे राग में खोने वाले बेराग को सुन
यही तो ताल है राग बे राग का 
बन जाता है बैराग 
ये मौत ये बेबशी और ये बैराग 
युही बुद्ध बनते नही 
...
कमाल तो देखो माया का 
राग पसंद छोड़ती नही 
गति जीवन जानकर
अवरोध भूल जाती है
तो क्यों न बैराग को
.....
क्या तारा बन जायेगा
तारे और ये सहारे

विस्मृति के कुए के इर्द गिर्द
दुनिया है सारी 
फैकते रहते है सिकंदर को भी
अब तेरी भी बारी है 


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