गुजरे कल के मार की पी डा आज है !!
कल्पना आने वाले कल की डरा रही है !!
आज खोता रहा हु
बस यही आदत ने हद कर दी है !!
कल्पना आने वाले कल की डरा रही है !!
आज खोता रहा हु
बस यही आदत ने हद कर दी है !!
...
अवरोध को देखो बार बार
अरे राग में खोने वाले बेराग को सुन
यही तो ताल है राग बे राग का
बन जाता है बैराग
ये मौत ये बेबशी और ये बैराग
युही बुद्ध बनते नही
...

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