आवेगस्य शमनं स्वधर्मेण ... यह सूत्र विनोबाजी की शोध है !
आवेग के बारे में बहोत चर्चे है किन्तु आवेग ईश्वर की देन है !! गति है !! और गति ही जीवन है !! और गति का योग्य मार्ग है !!यहाँ ही पैदा होता है स्वधर्म !! ज्यादातर लोगो ने धर्म का अर्थ संप्रदाय निकला है जो गलत है !! धर्म का अर्थ अपना फ़र्ज़ी कर्म है !!
आवेग के बारे में बहोत चर्चे है किन्तु आवेग ईश्वर की देन है !! गति है !! और गति ही जीवन है !! और गति का योग्य मार्ग है !!यहाँ ही पैदा होता है स्वधर्म !! ज्यादातर लोगो ने धर्म का अर्थ संप्रदाय निकला है जो गलत है !! धर्म का अर्थ अपना फ़र्ज़ी कर्म है !!

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