Thursday, August 28, 2014

लेना और देना

किसीको प्रेम ,किसीको पैसा ,किसीको नाम ,किसीको काम  बस मागने वाले ही है !! जैसे चारो और भिखारी !! इसी लिए एक बात सही है !!  देते जाओ बस देते जाओ !! सूरज जैसे प्रकाश देता है !!
 मुझे कर्ण  की कथा याद आती है !! इंद्र  ब्राह्मण का रूप लेकर जाता है और चालाकी से दान के रूप में कवचकुंडल माग लेता है !! तब कारण का सारथि  शल्य  कहता है। इन्द्र  ने आपको उल्लू  बनाया !! कर्ण  कहता है  । यज्ञ में दी हुई आहुति और किसीको दिया हुआ कभी नाशवंत नहीं है !! हुतम च दत्तं तथैव तिष्ठति !! 


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